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Physiotherapy

स्कोलियोसिस (रीढ़ की टेढ़ापन) का बिना सर्जरी इलाज

June 10, 2026 By Dr. Jaya Sharma

क्या आपने कभी किसी बच्चे या बड़े की पीठ देखते हुए महसूस किया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टेढ़ी लग रही है? एक कंधा दूसरे से ऊँचा, पीठ का झुकाव एक तरफ, या पीठ का उभरा हुआ हिस्सा दिखाई देता है? 

अगर हाँ, तो ये सब scoliosis के संकेत हो सकते हैं। भारत में इस रीढ़ की बीमारी के बारे में जागरूकता अभी भी बहुत कम है, और अक्सर लोग सोचते हैं कि इसका इलाज सिर्फ बड़ी सर्जरी से होता है। लेकिन सच यह है कि अधिकांश मामलों में बिना ऑपरेशन पीठ का इलाज बखूबी संभव है।

इस लेख में हम आपको scoliosis के बारे में शुरू से समझाएंगे, जैसे की यह होता क्या है, क्यों होता है, और सबसे ज़रूरी बात, रीढ़ की सर्जरी से बचाव कैसे किया जा सकता है।

स्कोलियोसिस क्या है? 

हमारी रीढ़ की हड्डी (spine) में आगे-पीछे की तरफ कुछ प्राकृतिक (natural) मोड़ होते हैं जो हमारे चलने, झुकने और खड़े रहने में मदद करते हैं। लेकिन जब रीढ़ की हड्डी का मुड़ना दाएं या बाएं तरफ होने लगे, यानी C या S की आकृति बनने लगे, तो इसे scoliosis कहते हैं।

सरल भाषा में कहें तो पीठ की हड्डी टेढ़ी होना जो सामान्य नहीं है, उसे ही scoliosis या spinal curvature की समस्या कहते हैं। यह समस्या अक्सर बचपन या किशोरावस्था (adolescence) में पहचानी जाती है।

कितने लोगों को होती है यह बीमारी?

यह सोचकर मत बैठिए कि scoliosis कोई दुर्लभ (rare) बीमारी है। दुनियाभर में यह 2 से 3 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करती है। Scoliosis के सबसे अधिक मामले 10 से 15 साल की उम्र में सामने आते हैं और यह लड़के-लड़कियों दोनों में समान रूप से होती है। लेकिन लड़कियों में इसके गंभीर होने की संभावना आठ गुना अधिक होती है।

भारत की बड़ी और युवा जनसंख्या को देखते हुए बच्चों में रीढ़ की समस्या एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।

स्कोलियोसिस के प्रकार

Scoliosis मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:

1. Idiopathic Scoliosis (अज्ञात कारण वाली): यह सबसे आम प्रकार है। “Idiopathic” का मतलब है कि इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं पता चलता। शोध बताते हैं कि यह परिवारों में चलती है यानी इसमें आनुवंशिक (genetic/hereditary) कड़ी होती है। सभी scoliosis मामलों में से लगभग 80 प्रतिशत idiopathic होते हैं।

2. Congenital Scoliosis (जन्मजात): यह एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डियाँ (vertebrae) माँ के गर्भ में ही ठीक से नहीं बन पातीं।

3. Neuromuscular Scoliosis (नसों और मांसपेशियों से जुड़ी): यह तब होती है जब रीढ़ को सहारा देने वाली नसों और मांसपेशियों में कोई समस्या हो, जैसे cerebral palsy या muscular dystrophy।

रीढ़ की बीमारी के लक्षण कैसे पहचानें?

अक्सर scoliosis की शुरुआत में कोई दर्द नहीं होता, इसीलिए पहचानने में देर हो जाती है। इन रीढ़ की बीमारी के लक्षण पर ध्यान दें:

  • एक कंधा दूसरे से ऊँचा दिखना
  • बैठने का सही तरीका न होने पर कमर का एक तरफ झुकना
  • पीठ के निचले हिस्से में एक तरफ उभार
  • खड़े होने पर शरीर का सीधा न दिखना
  • लंबे समय बाद कमर दर्द और रीढ़ में थकान
  • गंभीर मामलों में साँस लेने में तकलीफ

ध्यान दें: यदि आपके बच्चे की स्कूल जाँच में या घर पर ये संकेत दिखें, तो तुरंत किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलें।

Cobb Angle: जानिए आपकी रीढ़ को किस इलाज की ज़रूरत है?

डॉक्टर X-ray के ज़रिए हड्डियों की जाँच करते हैं और रीढ़ के झुकाव को मापते हैं। इस माप को Cobb Angle कहते हैं। इसी के आधार पर तय होता है कि इलाज कैसा होगा:

Cobb Angleस्थितिइलाज का तरीका
10° से कमसामान्यनिगरानी की ज़रूरत नहीं
10° – 20°हल्की (mild) scoliosisनिगरानी और exercise
20° – 40°मध्यम (moderate)brace और physiotherapy
40° से अधिकगंभीर (severe)surgery पर विचार

अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मरीज़ पहले तीन श्रेणियों में आते हैं जहाँ बिना ऑपरेशन पीठ का इलाज पूरी तरह संभव है।

बिना सर्जरी के स्कोलियोसिस का इलाज: क्या-क्या विकल्प हैं?

अब आते हैं सबसे ज़रूरी सवाल पर: क्या सच में बिना ऑपरेशन के scoliosis ठीक हो सकती है? जवाब है, हाँ, कई मामलों में scoliosis को बिना सर्जरी प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

1. Observation (निगरानी)

जब Cobb Angle हल्का हो (10° से 15°), तो डॉक्टर “wait and watch” यानी नियमित निगरानी की सलाह देते हैं। हर 4 से 6 महीने में हड्डियों की जाँच होती है ताकि देखा जा सके कि टेढ़ापन बढ़ रहा है या नहीं।

2. Bracing (पीठ का सहारा देने वाला बेल्ट)

पीठ का सहारा देने वाला बेल्ट यानी brace एक विशेष कमरबंद जो रीढ़ को और अधिक मुड़ने से रोकता है। Bracing, observation और surgery, ये तीनों scoliosis के प्रमाणित (proven) उपचार हैं और डॉक्टर इन्हें Cobb Angle और मरीज़ की उम्र के आधार पर recommend करते हैं।

Brace तब सबसे असरदार होता है जब:

  • बच्चे की हड्डियाँ अभी बढ़ रही हों
  • Cobb Angle 20° से 40° के बीच हो
  • बच्चा दिन में 16 से 23 घंटे brace पहने

Brace scoliosis को ठीक नहीं करता, लेकिन बच्चों में कमर टेढ़ी होना रोकता है, जो बहुत ज़रूरी है।

3. रीढ़ की फिजियोथेरेपी

रीढ़ की फिजियोथेरेपी non-surgical इलाज का सबसे महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक (long-term) हिस्सा है। Scoliosis-specific exercises जैसे Schroth Method रीढ़ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाती हैं, posture सुधारती हैं और पीठ दर्द का बिना दवा इलाज करती हैं।

2020 से 2025 के बीच हुए 13 अध्ययनों की एक narrative review के अनुसार, Schroth Method ने हल्की scoliosis और हड्डियों के विकास के शुरुआती चरण (early skeletal growth) में Cobb Angle को कम करने में उल्लेखनीय सफलता दिखाई है। साथ ही मरीज़ों की जीवन गुणवत्ता (quality of life) और शरीर की बनावट की स्वीकार्यता (aesthetic perception) में भी सुधार देखा गया।

रीढ़ मज़बूत करने के उपाय जो physiotherapy में शामिल हैं:

  • रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को संतुलित (balanced) करना
  • दर्द और थकान में कमी
  • साँस लेने की क्षमता बेहतर होना
  • दैनिक जीवन में स्वतंत्रता और आत्मविश्वास

4. Chiropractic Care (काइरोप्रैक्टिक देखभाल)

Chiropractic treatment में spine के joints को gentle adjustments दी जाती हैं जिससे रीढ़ की alignment (सीध) बेहतर होती है और कमर दर्द और रीढ़ की तकलीफ कम होती है। यह रीढ़ की फिजियोथेरेपी के साथ मिलकर और अच्छे नतीजे देता है। Denmark में 17,974 मरीज़ों पर हुए एक बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण (national survey) में 97% मरीज़ों ने chiropractic care से “बहुत अधिक” या “अधिक” संतुष्टि जताई, खासतौर पर जाँच, communication और इलाज की प्रभावशीलता के मामले में।

Painflame जैसे विशेष क्लीनिक में trained physiotherapists और chiropractors हर मरीज़ के लिए अलग exercise plan बनाते हैं, क्योंकि हर व्यक्ति की रीढ़ की स्थिति अलग होती है।

5. दर्द प्रबंधन (Pain Management)

अगर scoliosis की वजह से पीठ में दर्द हो, तो पीठ दर्द का बिना दवा इलाज के ये तरीके कारगर हैं:

  • गर्म सिकाई: मांसपेशियों को आराम देती है
  • TENS therapy (एक electrical stimulation से बिजली के हल्के दालों से दर्द कम होना): physiotherapy क्लीनिक में मिलती है
  • Anti-inflammatory दवाएँ: डॉक्टर की सलाह से, जैसे Ibuprofen

6. रीढ़ के लिए योगासन

भारतीय परंपरा में भी रीढ़ के लिए योगासन बेहद कारगर हैं। इनमें स्कोलियोसिस के घरेलू उपाय के रूप में ये आसन सबसे उपयोगी हैं:

  • Tadasana (ताड़ासन): पूरी रीढ़ को सीधा करता है
  • Trikonasana (त्रिकोणासन): रीढ़ की lateral stretch के लिए
  • Bhujangasana (भुजंगासन): पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है
  • Pranayama: फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है

सावधानी: योग हमेशा किसी trained instructor और physiotherapist की देखरेख में ही करें।

स्कोलियोसिस में सर्जरी कब ज़रूरी होती है?

रीढ़ की सर्जरी से बचाव तभी संभव नहीं रहता जब:

  • Cobb Angle 45° से अधिक हो और लगातार बढ़ रहा हो
  • साँस लेने में गंभीर तकलीफ हो
  • सभी non-surgical तरीके आज़माने के बाद भी कोई सुधार न हो

अच्छी बात यह है कि अधिकांश मरीज़ सर्जरी तक पहुँचते ही नहीं अगर समय पर diagnosis और सही इलाज शुरू हो जाए।

स्कोलियोसिस में क्या खाएं और कैसे रहें?

रीढ़ की बीमारी के लक्षण को बढ़ने से रोकने में खान-पान और जीवनशैली भी अहम भूमिका निभाती है। यहाँ कुछ स्कोलियोसिस के घरेलू उपाय हैं:

  • Calcium और Vitamin D: दूध, दही, और हरी सब्जियाँ हड्डियों को मज़बूत रखते हैं
  • Omega-3 Fatty Acids: अखरोट, अलसी, और  मछली सूजन (inflammation) कम करते हैं
  • बैठने का सही तरीका: बैठते, खड़े होते और सोते वक्त रीढ़ की सीध का ध्यान रखें
  • भारी बैग एक तरफ मत लटकाएं: दोनों कंधों पर बराबर वज़न रखें
  • Posture: बुढ़ापे में रीढ़ की समस्या से बचने के लिए युवावस्था से ही posture का ध्यान रखें

माता-पिता के लिए ज़रूरी बात

अगर आपके बच्चे को scoliosis है, तो घबराइए नहीं। अधिकांश scoliosis के मामले हल्के होते हैं और उन्हें किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती। ज़रूरत है तो बस समय पर हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलने और सही दिशा में कदम उठाने की। बच्चे को खेलने, दौड़ने और अपनी ज़िंदगी सामान्य रूप से जीने से मत रोकिए।

निष्कर्ष

रीढ़ हमारे पूरे शरीर की नींव है और scoliosis उस नींव में एक धीमी सी दरार की तरह है जिसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं। लेकिन यह सुनकर घबराइए मत। सही समय पर सही इलाज से यह दरार और गहरी होने से रोक सकते हैं। अधिकांश मामलों में बिना सर्जरी के भी रीढ़ की टेढ़ापन को काबू में लाया जा सकता है और एक सामान्य, दर्दमुक्त ज़िंदगी जी जा सकती है।

Scoliosis एक ऐसी रीढ़ की बीमारी है जो धैर्य, सही देखभाल और समय पर इलाज से काबू में आती है। रीढ़ की फिजियोथेरेपी, bracing और chiropractic care मिलकर वह काम कर सकते हैं जो बहुत से लोग केवल सर्जरी से उम्मीद करते हैं।

Painflame में हम रीढ़ को सिर्फ एक हड्डी की तरह नहीं, बल्कि आपकी पूरी ज़िंदगी की धुरी (axis) की तरह देखते हैं। Dr. Harish Grover और उनकी टीम spinal curvature के हर मामले को गहराई से समझकर एक ऐसा इलाज तैयार करती है जो सिर्फ आपके लिए बना हो। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या scoliosis में दर्द हमेशा होता है?

ज़रूरी नहीं। हल्की scoliosis में अक्सर कोई दर्द नहीं होता और यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। बहुत से लोगों को तब पता चलता है जब X-ray किसी और कारण से होती है। लेकिन जैसे-जैसे टेढ़ापन बढ़ता है, पीठ की मांसपेशियों पर असमान दबाव पड़ने लगता है और तब दर्द शुरू होता है। इसीलिए दर्द न होने का मतलब यह नहीं कि सब ठीक है; नियमित जाँच ज़रूरी है।

मेरे बच्चे की रीढ़ की हड्डी झुकी हुई है या टेढ़ी, दोनों में क्या फर्क है?

रीढ़ का झुकाव (tilt) अक्सर मांसपेशियों की कमज़ोरी या गलत posture से होता है और यह अस्थायी (temporary) हो सकता है। लेकिन जब रीढ़ की हड्डी खुद C या S आकार में मुड़ जाए, तो यह स्कोलियोसिस हो सकता है जिसकी पुष्टि X-ray से Cobb Angle मापकर की जाती है। अगर बच्चे को आगे झुकाने पर पीठ का एक हिस्सा दूसरे से ऊँचा दिखे, तो बिना देर किए किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलें।

क्या scoliosis में नींद के लिए कोई खास तरीका है?

हाँ। scoliosis के मरीज़ों के लिए पीठ के बल या करवट लेकर सोना बेहतर माना जाता है। पेट के बल सोने से रीढ़ पर अनावश्यक (unnecessary) दबाव पड़ता है जो स्थिति को बिगाड़ सकता है। घुटनों के बीच एक तकिया रखकर करवट से सोना रीढ़ को प्राकृतिक सीध में रखता है और नींद भी बेहतर होती है।

क्या mobile और laptop के ज़्यादा इस्तेमाल से scoliosis बढ़ सकती है?

सीधे तौर पर mobile या laptop scoliosis का कारण नहीं बनते, लेकिन लगातार गर्दन झुकाकर screen देखना, जिसे “text neck” कहते हैं, रीढ़ पर बहुत बुरा असर डालता है। जिन लोगों को पहले से scoliosis है उनमें यह आदत टेढ़ापन को और बढ़ा सकती है। Screen को हमेशा आँखों की सीध में रखें और हर 30 मिनट में उठकर थोड़ा चलें।

क्या scoliosis का पता घर पर लगाया जा सकता है?

एक आसान तरीका है जिसे Adam’s Forward Bend Test कहते हैं। इसमें व्यक्ति आगे की तरफ झुकता है और पीछे से देखने पर अगर पीठ का एक हिस्सा दूसरे से ऊँचा दिखे तो यह scoliosis का संकेत हो सकता है। लेकिन यह सिर्फ एक प्रारंभिक (initial) जाँच है। पक्की diagnosis के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ से X-ray करवाना ज़रूरी है।

क्या scoliosis एक बार ठीक होने के बाद दोबारा हो सकती है?

Scoliosis पूरी तरह “ठीक” नहीं होता, इसे manage किया जाता है। अगर इलाज बीच में छोड़ दिया जाए, exercise बंद कर दी जाए, या posture का ध्यान न रखा जाए, तो टेढ़ापन दोबारा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों में जब तक हड्डियाँ बढ़ रही हों, नियमित निगरानी बेहद ज़रूरी है। इसीलिए रीढ़ की फिजियोथेरेपी एक बार का इलाज नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है।

Sources: 

  1. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15837-scoliosis
  2. https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/scoliosis/diagnosis-treatment/drc-20350721
  3. https://www.childorthspinecare.com/spinal-deformity-scoliosis/
  4. https://www.asterhospitals.in/blogs-events-news/aster-cmi-bangalore/scoliosis-treatment-non-surgical-approach-right-me
  5. https://orthoinfo.aaos.org/en/treatment/nonsurgical-treatment-options-for-scoliosis/
Author profile

Dr. Jaya Sharma

Pilates Expert | Musculoskeletal Rehabilitation, Sports & Pelvic Floor Specialist

Dr. Jaya Sharma is a dedicated physiotherapist and Pilates expert with 5 years of clinical experience in rehabilitation and movement-based therapy. She specializes in musculoskeletal rehabilitation, sports injury management, and pelvic floor rehabilitation, helping...

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