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Pain Management

साइटिका दर्द (Sciatica Pain) से राहत: फिज़ियोथेरेपी और व्यायाम गाइड

Written by: Dr. Saurabh Chauhan Reviewed by: Dr. Harish Grover Published: 10 June 2026 Last Updated: 10 June 2026
Reading Time: 8 minutes Evidence Level: Evidence-Based Clinical Guidance

क्या आपको कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर नितंब, जाँघ और पैर तक एक तेज़, जलन भरा दर्द महसूस होता है? बैठने पर दर्द बढ़ जाता है? खाँसने या छींकने पर भी झटका लगता है? यह Sciatica pain हो सकता है, जिसे लम्बर रेडिकुलोपैथी (Lumbar Radiculopathy) भी कहते हैं। साइटिका की lifetime incidence 10% से 40% तक है, यानी हर 10 में से कम से कम 1 व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी में साइटिका का अनुभव होता है। साइटिका के अधिकांश मामले बिना सर्जरी, सिर्फ फिज़ियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग और सही काइरोप्रैक्टिक उपचार से कुछ हफ्तों से महीनों में ठीक हो जाते हैं। इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि साइटिका क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या हैं, और फिज़ियोथेरेपी और व्यायाम से कैसे मिलती है स्थायी राहत।

साइटिका क्या होता है?

साइटिक नर्व (Sciatic Nerve) हमारे शरीर की सबसे लंबी और मोटी नस है। यह लम्बर स्पाइन (कमर की रीढ़) से शुरू होकर नितंब, जाँघ और पैरों से होती हुई पंजों तक जाती है।

साइटिका तब होता है जब इस नस पर, या इसकी नसों के रास्ते पर, दबाव पड़ता है या जलन होती है। Cleveland Clinic के अनुसार, साइटिका दो तरह का होता है:

  • ट्रू साइटिका (True Sciatica): जब हर्नियेटेड डिस्क, बोन स्पर्स या स्पाइनल स्टेनोसिस सीधे नस पर दबाव डालते हैं
  • साइटिका-जैसी स्थितियाँ: जैसे पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम (Piriformis Syndrome), जिसमें नितंब की एक मांसपेशी साइटिक नर्व को दबाती है

साइटिका सबसे ज़्यादा 30 से 50 साल की उम्र के लोगों को प्रभावित करता है और आमतौर पर शरीर के एक तरफ होता है।

Sciatica Pain के मुख्य कारण क्या हैं?

साइटिका के मुख्य कारणविवरण
हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc)साइटिका का सबसे आम कारण लम्बर हर्नियेटेड डिस्क है। जब डिस्क का नरम अंदरूनी हिस्सा बाहर निकलकर साइटिक नर्व रूट पर दबाव डालता है, तो साइटिका दर्द शुरू होता है।
स्पाइनल स्टेनोसिस (Spinal Stenosis)रीढ़ की नहर का संकुचन, जिसमें नर्व रूट्स के लिए जगह कम हो जाती है और नर्व कम्प्रेशन होती है।
पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम (Piriformis Syndrome)नितंब में पिरिफॉर्मिस मसल के तंग होने पर वह साइटिक नर्व को दबा सकती है। यह साइटिका-जैसा दर्द पैदा करती है।
लंबे समय तक बैठना और गलत पोस्चरलंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, खासकर office workers और truck drivers में, साइटिका का एक प्रमुख कारण है।
भारी वज़न उठाना और गलत movementबार-बार मुड़ना, झुकना या भारी चीज़ें गलत तरीके से उठाना लम्बर डिस्क पर दबाव बढ़ाता है।
मोटापा और डायबिटीज़अधिक वज़न स्पाइन पर दबाव बढ़ाता है और डायबिटीज़ नर्व डैमेज का खतरा बढ़ाती है, दोनों साइटिका के risk factors हैं।

साइटिका के लक्षण जो नज़रअंदाज़ न करें

  • कमर से नितंब और पैर तक जाने वाला तेज़, धड़कता या जलन जैसा दर्द (रेडिएटिंग लेग पेन)
  • दर्द जो बिजली के झटके जैसा महसूस हो
  • पैर या पंजे में नंबनेस (सुन्नपन) या टिंगलिंग (झनझनाहट)
  • पैर की मांसपेशियों में कमज़ोरी (मसल वीकनेस)
  • लंबे समय तक बैठने पर दर्द बढ़ना
  • खाँसने, छींकने पर दर्द तेज़ होना
  • आमतौर पर शरीर के एक तरफ असर

ये लक्षण emergency हो सकते हैं, तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर:

  • पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे (कॉडा इक्विना सिंड्रोम)
  • पैर में अचानक गंभीर कमज़ोरी
  • किसी accident के बाद दर्द हो

फिज़ियोथेरेपी से साइटिका में कैसे मिलती है राहत?

एक systematic review के अनुसार, एक्सरसाइज़ थेरेपी, मैनुअल थेरेपी और नर्व मोबिलाइज़ेशन साइटिका के clinical guidelines में recommended हैं।

फिज़ियोथेरेपी तीन चरणों में काम करती है:

चरण 1 – दर्द कम करना (Pain Relief Phase): शुरुआती stage में मैनुअल थेरेपी, जेंटल नर्व स्ट्रेचिंग, स्पाइनल मोबिलिटी वर्क और हीट-कोल्ड थेरेपी से साइटिक नर्व की संवेदनशीलता कम की जाती है।

चरण 2 – मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी सुधारना: नर्व मोबिलाइज़ेशन (Nerve Mobilization), हैमस्ट्रिंग स्ट्रेचिंग और स्पाइनल मोबिलिटी एक्सरसाइज़ से नसों की गति सुधरती है और दर्द कम होता है।

चरण 3 – कोर स्ट्रेंथनिंग और दीर्घकालीन रोकथाम: कोर मसल्स, ग्लूट (नितंब की मांसपेशियाँ) और लोअर बैक मसल्स को मज़बूत करने से साइटिका दोबारा नहीं होगी।

काइरोप्रैक्टिक उपचार और स्पाइनल मैनिपुलेशन

एक systematic review के अनुसार, 15 randomized clinical trials के analysis में स्पाइनल मैनुअल थेरेपी (SMT) दर्द में statistically significant improvement देती है।

फिज़िकल थेरेपी में स्ट्रेचिंग, दर्द नियंत्रण की तकनीकें और स्पाइन को support देने वाले exercises शामिल होते हैं, जो साइटिका के लिए एक excellent treatment option हैं।

साइटिका के लिए प्रमुख व्यायाम – घर पर भी करें

ये exercises साइटिक नर्व पर दबाव कम करती हैं, हैमस्ट्रिंग और पिरिफॉर्मिस मसल को stretch करती हैं और कोर को मज़बूत करती हैं। शुरुआत में किसी expert की guidance में करें।

1. पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच (Figure-4 Stretch)

पीठ के बल लेटें, दोनों घुटने मोड़ें। दायाँ पैर बाईं जाँघ पर रखें और दोनों पैरों को धीरे-धीरे छाती की तरफ खींचें। नितंब में खिंचाव महसूस होगा। 20-30 सेकंड रोकें, 2-3 बार दोनों तरफ करें। यह पिरिफॉर्मिस मसल को stretch करता है जो साइटिक नर्व पर दबाव डाल सकती है।

2. हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच (Hamstring Stretch)

पीठ के बल लेटें। एक पैर सीधा रखें, दूसरे को घुटने से मोड़ें। तौलिया या बैंड से पैर का पंजा पकड़ें और पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं जब तक जाँघ के पीछे खिंचाव न हो। 30 सेकंड रोकें। टाइट हैमस्ट्रिंग साइटिका के symptoms बढ़ाती है।

3. नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच (Knee to Chest Stretch)

पीठ के बल लेटें। एक घुटना मोड़कर छाती की तरफ खींचें। 15-20 सेकंड रोकें, दोनों तरफ 2-3 बार करें। यह लम्बर स्पाइन को decompress करता है और साइटिक नर्व पर दबाव कम करता है।

4. सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट (Sitting Spinal Stretch)

ज़मीन पर बैठें, पैर सीधे आगे। दायाँ घुटना मोड़ें और पंजा बाईं जाँघ के बाहर रखें। बाईं कोहनी को दाहिने घुटने के बाहर रखकर धीरे से दाईं तरफ मुड़ें। 30 सेकंड रोकें। यह स्पाइन में स्पेस बनाता है और नर्व कम्प्रेशन कम करता है।

5. साइटिक नर्व ग्लाइड (Sciatic Nerve Glide)

पीठ के बल लेटें। घुटने के पीछे से पैर पकड़ें और घुटने को धीरे से सीधा करें, फिर पंजे को आगे-पीछे मोड़ें। 10 बार, 2 सेट, दिन में 2 बार। यह नर्व मोबिलाइज़ेशन technique नस की smooth movement सुनिश्चित करती है।

6. ग्लूट ब्रिज (Glute Bridge)

पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें, पैर ज़मीन पर। कूल्हे ऊपर उठाएं, 5-10 सेकंड रोकें, धीरे से नीचे लाएं। 10-15 बार करें। यह ग्लूट मसल्स और कोर को activate करता है जो स्पाइन को support देते हैं।

7. कोर प्लैंक (Core Plank)

पेट के बल लेटें, forearms और पंजों पर body उठाएँ। शरीर बिल्कुल सीधा रखें, 15-30 सेकंड रोकें, 3-5 बार करें। कोर स्ट्रेंथ लम्बर स्पाइन को स्थिर रखती है और साइटिका की पुनरावृत्ति रोकती है।

साइटिका में क्या नहीं करना चाहिए?

  • आगे की तरफ ज़्यादा झुकना (फ्लेक्शन), इससे हर्नियेटेड डिस्क का दबाव बढ़ता है
  • लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना
  • भारी वज़न उठाना
  • दर्द बढ़ने पर exercise जारी रखना
  • बेड रेस्ट, PubMed की guidelines के अनुसार, बेड रेस्ट से साइटिका और बिगड़ सकती है; active रहना ज़रूरी है

Painflame में साइटिका का उपचार

Painflame क्लिनिक, गुरुग्राम में हम साइटिका दर्द के लिए एक comprehensive approach अपनाते हैं:

  • डिटेल्ड असेसमेंट: साइटिका की exact वजह identify करना
  • काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट: नर्व कम्प्रेशन और स्पाइनल मिसएलाइनमेंट ठीक करना
  • स्पाइनल डीकम्प्रेशन थेरेपी: डिस्क पर दबाव कम करना
  • मैनुअल थेरेपी: पिरिफॉर्मिस, ग्लूट और लम्बर मसल्स release करना
  • फिज़ियोथेरेपी: नर्व ग्लाइडिंग, स्ट्रेचिंग और कोर स्ट्रेंथनिंग
  • पोस्चर करेक्शन: दीर्घकालीन रोकथाम के लिए

साइटिका से बचाव के लिए क्या करें?

  • कोर मसल्स को नियमित एक्सरसाइज़ से मज़बूत रखें
  • बैठते समय लम्बर सपोर्ट वाली कुर्सी इस्तेमाल करें
  • भारी चीज़ें उठाते समय कमर नहीं, घुटने मोड़ें
  • हर 45 मिनट में उठें और स्ट्रेचिंग करें
  • स्वस्थ वज़न बनाए रखें
  • डायबिटीज़ को control में रखें
  • स्मोकिंग बंद करें, यह नर्व हीलिंग को धीमा करती है

निष्कर्ष

Sciatica pain तकलीफदेह ज़रूर है, लेकिन सही फिज़ियोथेरेपी और काइरोप्रैक्टिक उपचार से बिना सर्जरी इस पर काबू पाया जा सकता है। नर्व ग्लाइडिंग, पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच, हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच और कोर स्ट्रेंथनिंग, ये exercises साइटिक नर्व पर दबाव कम करती हैं और दीर्घकालीन राहत देती हैं।

Painflame क्लिनिक, गुरुग्राम में 14+ वर्षों के अनुभव के साथ हम साइटिका की जड़ का इलाज करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. साइटिका क्या होता है और यह किस उम्र में होता है? 

साइटिका तब होता है जब साइटिक नर्व, जो कमर से पैर तक जाती है, पर दबाव या जलन होती है। यह 30 से 50 साल की उम्र में सबसे ज़्यादा होता है। Healthline के अनुसार, जीवनकाल में 10-40% लोगों को यह समस्या होती है।

2. Sciatica pain में फिज़ियोथेरेपी कितनी जल्दी असर करती है? 

हल्के साइटिका में कुछ हफ्तों में सुधार शुरू हो जाता है। 4 से 8 हफ्तों की targeted फिज़ियोथेरेपी से अधिकांश मरीज़ काफी बेहतर हो जाते हैं।

3. क्या साइटिका बिना सर्जरी ठीक हो सकता है? 

हाँ। Mayo Clinic के अनुसार, साइटिका के अधिकांश मामले फिज़ियोथेरेपी, काइरोप्रैक्टिक उपचार और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ से ठीक हो जाते हैं। सर्जरी सिर्फ गंभीर cases में ज़रूरी होती है।

4. साइटिका में कौन से व्यायाम सबसे फायदेमंद हैं? 

पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच, हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच, नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच, साइटिक नर्व ग्लाइड और ग्लूट ब्रिज सबसे प्रभावी हैं। शुरुआत में expert की guidance ज़रूरी है।

5. काइरोप्रैक्टिक उपचार साइटिका में कैसे मदद करता है? 

काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट लम्बर स्पाइन का एलाइनमेंट सुधारता है और नर्व कम्प्रेशन कम करता है। स्पाइनल मैनुअल थेरेपी हाल ही में शुरू हुए साइटिका में पीठ दर्द में significant improvement देती है।

Sources:

https://oahct.com/wp-content/uploads/2020/04/OAH-SCIATICA-EXERCISES-R2.pdf

https://www.healthline.com/health/back-pain/sciatic-stretches

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1836955320300229

Dr. Saurabh Chauhan
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Dr. Saurabh Chauhan

Chiropractor, Spine and Joint Specialist

Dr. Saurabh Chauhan is a dedicated Chiropractor and Spine & Joint Specialist with expertise in chiropractic adjustments, manual therapy, and physiotherapy. He specializes in treating back pain, neck stiffness, joint disorders, and postural imbalances...

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