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स्लिप डिस्क क्या है? लक्षण, कारण और फिज़ियोथेरेपी से इलाज

Anna Rue
Anna Rue

We are committed to providing our patients with the highest quality of care.

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क्या आपकी पीठ के निचले हिस्से में अचानक तेज़ दर्द उठता है जो पैरों तक जाता है? उठने-बैठने में तकलीफ होती है? हाथ या पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है? यह स्लिप डिस्क (Slip Disc) हो सकता है, जिसे हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc) या डिस्क हर्नियेशन (Disc Herniation) भी कहते हैं। भारत में भी यह एक बेहद आम समस्या है जो 30 से 50 साल की उम्र के लोगों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती है।

अच्छी बात यह है कि, स्लिप डिस्क के अधिकांश मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। फिज़ियोथेरेपी, काइरोप्रैक्टिक उपचार और स्पाइनल डीकम्प्रेशन जैसी non-surgical therapies से 85% से अधिक मरीज़ 6-12 हफ्तों में बेहतर हो जाते हैं।

इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि स्लिप डिस्क क्या होती है, इसके कारण और लक्षण क्या हैं, कैसे जांच होती है, और बिना सर्जरी इसका इलाज कैसे किया जाता है।

Slip Disc क्या होती है?

हमारी रीढ़ की हड्डी 24 छोटी हड्डियों (वर्टीब्रा) से मिलकर बनी है। इन हड्डियों के बीच गोल, रबर जैसे इंटरवर्टीब्रल डिस्क होती हैं, जो हमारी रीढ़ को लचीला बनाती हैं और चलने, मुड़ने और वज़न उठाने के दौरान शॉक अब्ज़ॉर्बर की तरह काम करती हैं।

हर डिस्क के दो हिस्से होते हैं:

  • अंदर का नरम, जेली जैसा हिस्सा
  • बाहर का मज़बूत, रेशेदार आवरण

Slip disc तब होती है जब चोट, कमज़ोरी या उम्र के कारण बाहरी आवरण में दरार पड़ जाती है और अंदर का नरम हिस्सा बाहर की तरफ उभर आता है। यह उभरा हुआ हिस्सा पास की स्पाइनल नर्व पर दबाव डालता है, जिससे दर्द, सुन्नपन और कमज़ोरी होती है।

स्लिप डिस्क रीढ़ में कहीं भी हो सकती है, लेकिन सबसे आम जगहें हैं:

  • लम्बर डिस्क हर्नियेशन: कमर के निचले हिस्से में (सबसे आम)
  • सर्वाइकल डिस्क हर्नियेशन: गर्दन में

स्लिप डिस्क के मुख्य कारण क्या हैं?

कारणविवरण
उम्र के साथ घिसाव (Age-related Degeneration)उम्र बढ़ने के साथ डिस्क का पानी कम होता जाता है और वे कम लचीली हो जाती हैं। इससे डिस्क डीजेनरेशन होता है और वे आसानी से फट सकती हैं। यह स्लिप डिस्क का सबसे बड़ा कारण है।
गलत तरीके से भारी चीज़ें उठानाघुटनों के बजाय कमर झुकाकर वज़न उठाने से लम्बर स्पाइन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और डिस्क फट सकती है। यह स्लिप डिस्क का दूसरा सबसे आम कारण है।
अचानक झटका या चोट (Sudden Injury)गिरना, एक्सीडेंट, या अचानक मुड़ने की वजह से डिस्क अपनी जगह से हिल सकती है।
गलत पोस्चर और लंबे समय तक बैठनाAmerican Academy of Orthopaedic Surgeons के अनुसार, लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, खासकर गलत पोस्चर में, स्पाइनल डिस्क पर लगातार दबाव डालता है।
मोटापा (Obesity)अतिरिक्त शरीर का वज़न लम्बर स्पाइन पर अतिरिक्त दबाव डालता है जिससे डिस्क जल्दी घिसती है।
कमज़ोर कोर मसल्स (Core Muscles)कोर मसल्स (पेट और पीठ की मांसपेशियाँ) स्पाइन को support देती हैं। इनके कमज़ोर होने पर डिस्क पर ज़्यादा दबाव पड़ता है।
स्मोकिंगस्मोकिंग डिस्क की blood supply कम करती है, जिससे डिस्क डीजेनरेशन तेज़ होती है।
आनुवंशिक कारण (Genetics)कुछ लोगों में डिस्क की संरचना आनुवंशिक रूप से कमज़ोर होती है, जिससे हर्नियेशन का खतरा अधिक रहता है।

Slip Disc के लक्षण जो नज़रअंदाज़ न करें

स्लिप डिस्क के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि डिस्क कहाँ है और किस नस पर दबाव है:

कमर में स्लिप डिस्क (Lumbar Disc Herniation) के लक्षण:

  • कमर में तेज़ दर्द जो नितंब, जाँघ और पैरों तक फैले (साइटिका)
  • पैरों या पंजों में नंबनेस (सुन्नपन) या टिंगलिंग (झनझनाहट)
  • पैरों में मसल वीकनेस (कमज़ोरी)
  • खड़े होने, बैठने या चलने पर दर्द बढ़ना
  • खाँसने या छींकने पर दर्द तेज़ होना

गर्दन में स्लिप डिस्क (Cervical Disc Herniation) के लक्षण:

  • गर्दन दर्द जो कंधे, बाहों या हाथों तक जाए
  • हाथों में नंबनेस या टिंगलिंग
  • हाथ की पकड़ कमज़ोर होना (ग्रिप स्ट्रेंथ कम होना)

तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर:

Cleveland Clinic के अनुसार, ये लक्षण emergency का संकेत हो सकते हैं:

  • पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे (कॉडा इक्विना सिंड्रोम का संकेत)
  • दोनों पैरों में गंभीर कमज़ोरी
  • तेज़ी से बढ़ता हुआ नंबनेस

स्लिप डिस्क की जांच कैसे होती है?

American Academy of Orthopaedic Surgeons के अनुसार, slip disc की जांच में शामिल हैं:

फिज़िकल एग्ज़ामिनेशन: डॉक्टर मसल स्ट्रेंथ, रिफ्लेक्स और नर्व फंक्शन की जांच करते हैं। स्ट्रेट लेग रेज़ टेस्ट (SLR Test), जिसमें पीठ के बल लेटकर पैर सीधा ऊपर उठाया जाता है, लम्बर डिस्क हर्नियेशन की पहचान का एक reliable तरीका है।

इमेजिंग टेस्ट:

  • एमआरआई (MRI): सबसे best test, डिस्क, नसें और soft tissue clearly दिखती हैं
  • एक्स-रे: हड्डियों की स्थिति देखने के लिए, फ्रैक्चर rule out करने के लिए
  • सीटी स्कैन (CT Scan): जब MRI न हो सके

स्लिप डिस्क का बिना सर्जरी इलाज: फिज़ियोथेरेपी और काइरोप्रैक्टिक उपचार

स्लिप डिस्क के अधिकांश मरीज़ बिना सर्जरी ठीक हो जाते हैं। एक narrative review के अनुसार, मोबिलाइज़ेशन, मैनिपुलेशन, एक्सरसाइज़ थेरेपी और स्पाइनल ट्रैक्शन, ये सभी लम्बर डिस्क हर्नियेशन में moderate evidence के साथ प्रभावी पाए गए हैं।

1. काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट (Chiropractic Adjustment)

एक case study (Cureus, 2023) के अनुसार, एक 52 साल के मरीज़ में गंभीर लम्बर डिस्क हर्नियेशन को 10 हफ्तों के काइरोप्रैक्टिक उपचार से ठीक किया गया, 6 महीने बाद MRI में डिस्क का पूर्ण resolution देखा गया। काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट से नर्व कम्प्रेशन कम होती है, स्पाइनल एलाइनमेंट सुधरता है और जॉइंट मोबिलिटी बेहतर होती है।

2. स्पाइनल डीकम्प्रेशन थेरेपी (Spinal Decompression)

Journal of Contemporary Chiropractic (2024) में प्रकाशित एक case series के अनुसार, नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकम्प्रेशन (NSD) काइरोप्रैक्टिक केयर के साथ मिलकर लम्बर डिस्क हर्नियेशन के साइज़ को कम करने में प्रभावी है। इस therapy में रीढ़ को धीरे से खींचा जाता है, जिससे डिस्क के अंदर negative pressure बनता है और उभरी हुई डिस्क वापस खिंचती है।

3. मैनुअल थेरेपी और मोबिलाइज़ेशन

हाथों से की जाने वाली मैनुअल थेरेपी में जॉइंट मोबिलाइज़ेशन, मायोफेशियल रिलीज़ और सॉफ्ट टिशू थेरेपी शामिल हैं। इससे मसल स्पैज़्म कम होता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और रेंज ऑफ मोशन बढ़ती है।

4. फिज़ियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज़

फिज़ियोथेरेपी स्लिप डिस्क उपचार की नींव है। AAOS के अनुसार, इसमें शामिल हैं:

  • कोर स्ट्रेंथनिंग: स्पाइन को support देने वाली मांसपेशियाँ मज़बूत करना
  • McKenzie Method: लम्बर एक्सटेंशन एक्सरसाइज़ से डिस्क को वापस जगह पर लाने की कोशिश
  • स्ट्रेचिं: मसल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाना
  • नर्व मोबिलाइज़ेशन: साइटिका के मरीज़ों में नस को release करना
  • पेल्विक टिल्ट, ब्रिजेज़, कैट-काउ स्ट्रेच: स्पाइनल स्टेबिलिटी के लिए

5. पोस्चर करेक्शन और एर्गोनॉमिक सलाह

गलत पोस्चर स्लिप डिस्क का बड़ा कारण और दर्द बढ़ाने वाला फैक्टर है। Painflame में हम आपको सही बैठने, सोने, चलने और वज़न उठाने के techniques सिखाते हैं।

6. हीट और कोल्ड थेरेपी

शुरुआती सूजन कम करने के लिए कोल्ड पैक और मांसपेशियों को आराम देने के लिए हीट थेरेपी प्रभावी होती हैं।

स्लिप डिस्क में सर्जरी कब ज़रूरी होती है?

हर्नियेटेड डिस्क में surgery की ज़रूरत बहुत कम होती है। सिर्फ कुछ cases में ही surgical intervention की ज़रूरत पड़ती है।

  • 6 हफ्तों के conservative उपचार के बाद भी कोई सुधार न हो
  • नर्व कम्प्रेशन इतनी गंभीर हो कि पैरों में paralysis का खतरा हो
  • पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे (कॉडा इक्विना सिंड्रोम)
  • मसल वीकनेस तेज़ी से बढ़ रही हो

Painflame में Slip Disc का उपचार

Painflame क्लिनिक, गुरुग्राम में हम स्लिप डिस्क के लिए एक comprehensive नॉन-सर्जिकल approach अपनाते हैं:

  • काइरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट: स्पाइनल एलाइनमेंट सुधारना और नर्व कम्प्रेशन कम करना
  • नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकम्प्रेशन: डिस्क पर दबाव कम करना
  • मैनुअल थेरेपी: मायोफेशियल रिलीज़ और मोबिलाइज़ेशन
  • फिज़ियोथेरेपी: कोर स्ट्रेंथनिंग और रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज़
  • पोस्चर करेक्शन: दैनिक जीवन में स्पाइन को protect करना

स्लिप डिस्क से बचाव के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट्स की सलाह:

  • भारी चीज़ें उठाते समय कमर नहीं, घुटने मोड़ें
  • स्वस्थ वज़न बनाए रखें: मोटापा लम्बर स्पाइन पर दबाव बढ़ाता है
  • लंबे समय तक एक जगह न बैठें, हर 45 मिनट में उठें और स्ट्रेचिंग करें
  • कोर मसल्स को नियमित एक्सरसाइज़ से मज़बूत रखें
  • पोस्चर का ध्यान रखें और सही एर्गोनॉमिक setup इस्तेमाल करें
  • स्मोकिंग बंद करें, यह डिस्क डीजेनरेशन तेज़ करती है

निष्कर्ष

स्लिप डिस्क एक दर्दनाक लेकिन अधिकांश मामलों में बिना सर्जरी ठीक होने वाली समस्या है। सही समय पर फिज़ियोथेरेपी, काइरोप्रैक्टिक उपचार और स्पाइनल डीकम्प्रेशन से नर्व कम्प्रेशन कम होती है, डिस्क ठीक होती है और आप दर्द-मुक्त जीवन की तरफ बढ़ सकते हैं।

Painflame क्लिनिक, गुरुग्राम में 14+ वर्षों के अनुभव और 3.1 लाख से अधिक ट्रीटेड मरीज़ों के साथ हम Slip Disc की जड़ का इलाज करते हैं, सिर्फ लक्षणों का नहीं।

आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. स्लिप डिस्क क्या होती है? 

स्लिप डिस्क तब होती है जब रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क का नरम अंदरूनी हिस्सा बाहरी आवरण में दरार से बाहर निकल आता है और पास की स्पाइनल नर्व पर दबाव डालता है। यह लम्बर स्पाइन (कमर) में सबसे ज़्यादा होती है और इससे दर्द, नंबनेस और कमज़ोरी हो सकती है।

2. स्लिप डिस्क के शुरुआती लक्षण क्या हैं? 

शुरुआत में कमर या गर्दन में दर्द होता है जो बैठने, उठने या खाँसने पर बढ़ता है। पैरों या बाहों में झनझनाहट और सुन्नपन आना शुरू हो सकता है। साइटिका, यानी कमर से पैर तक जाने वाला दर्द, लम्बर डिस्क हर्नियेशन का एक प्रमुख शुरुआती संकेत है।

3. क्या स्लिप डिस्क बिना सर्जरी ठीक हो सकती है? 

हाँ। 85% से अधिक स्लिप डिस्क के मरीज़ बिना सर्जरी, फिज़ियोथेरेपी और काइरोप्रैक्टिक उपचार से 6-12 हफ्तों में बेहतर हो जाते हैं। सर्जरी सिर्फ कुछ गंभीर मामलों में ज़रूरी होती है।

4. स्लिप डिस्क की जांच कैसे होती है? 

AAOS के अनुसार, फिज़िकल एग्ज़ामिनेशन और स्ट्रेट लेग रेज़ टेस्ट से शुरुआती diagnosis होती है। MRI सबसे बेहतर imaging test है जो डिस्क और नर्व कम्प्रेशन को clearly दिखाती है। ज़रूरत पड़ने पर एक्स-रे या CT स्कैन भी किया जाता है।

5. स्लिप डिस्क में क्या नहीं करना चाहिए? 

आगे की तरफ झुकने, भारी वज़न उठाने, लंबे समय तक बैठने और अचानक मुड़ने से बचें। Complete बेड रेस्ट भी नुकसानदेह हो सकती है, हल्की वॉकिंग और स्ट्रेचिंग ज़्यादा फायदेमंद हैं।

Sources:

https://www.maxhealthcare.in/blogs/all-about-slip-disc-disease
https://www.healthline.com/health/herniated-disk
https://www.thephysiotherapyplace.com/your-injury/back/slipped-disc

https://www.manipalhospitals.com/jaipur/blog/slipped-disc-symptoms-causes-treatment-surgery/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279469/

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